
कांड्रा। कांड्रा क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर शुक्रवार को जितिया पर्व श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर महिलाओं ने अपनी संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि, सुरक्षा और आरोग्य की कामना को लेकर कठिन निर्जला व्रत रखा और विधि-विधान से जितिया माता की पूजा-अर्चना की।
जितिया व्रत का मुख्य उद्देश्य संतान की दीर्घायु और उनके जीवन की रक्षा की कामना करना है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करने से संतान को दीर्घायु और आरोग्यता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। माताएं अपने बच्चों के सुखद एवं सुरक्षित जीवन की कामना के साथ इस कठिन व्रत को करती हैं।
जितिया व्रत की कथा महाभारत काल से जुड़ी मानी जाती है। राजा जीमूतवाहन के त्याग और परोपकार की कथा इस पर्व का आधार मानी जाती है। मान्यता है कि जीमूतवाहन ने नागों की रक्षा के लिए अपने प्राणों का त्याग करने का संकल्प लिया था। उनके त्याग और समर्पण से प्रसन्न होकर देवताओं ने उन्हें आशीर्वाद दिया। इसी धार्मिक मान्यता के आधार पर संतान की रक्षा और दीर्घायु के लिए माताओं द्वारा जितिया व्रत रखने की परंपरा चली आ रही है।
यह व्रत तीन दिनों तक चलने वाला कठिन अनुष्ठान है, जिसमें नहाय-खाय, जितिया व्रत तथा पारण की परंपरा होती है। व्रत के दौरान महिलाएं निर्जला उपवास रखकर अपनी संतान के मंगलमय जीवन की प्रार्थना करती हैं। यह कठिन उपवास माताओं के त्याग, समर्पण और संतान के प्रति अटूट प्रेम का प्रतीक माना जाता है।
कांड्रा में आयोजित पूजा-अर्चना में मिनती दे, शोभा दे, रुमा दे, राखी दे, नेहा दे सहित क्षेत्र की बड़ी संख्या में माताओं ने श्रद्धापूर्वक व्रत रखकर पूजा की। इस दौरान महिलाओं ने सामूहिक रूप से जितिया माता की पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-शांति एवं संतान के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
