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BREAKING: अमलगम रोड पर मौत का मोड़, तेज रफ्तार हाइवा ने कर्मचारी को 15 फीट तक घसीटा, आधे घंटे तक नहीं पहुंची कंपनी की रेस्क्यू टीम, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

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कांड्रा थाना अंतर्गत अमलगम रोड में शुक्रवार सुबह अमानवीय लापरवाही और अव्यवस्थित ट्रैफिक व्यवस्था ने एक बड़ा हादसा पैदा कर दिया। ड्यूटी पर जा रहे अमलगम स्टील प्लांट के कर्मचारी सुभाष प्रमाणिक को एक तेज रफ्तार हाइवा ने जोरदार टक्कर मारी और लगभग 15 फीट तक घसीटते हुए ले गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि सुभाष अपनी मोटरसाइकिल समेत हाइवा के नीचे लगभग आधे घंटे तक फंसे रहे।

घायल सुभाष प्रमाणिक एसएमएस विभाग में कांट्रेक्टर भोला प्रसाद के अधीन कार्यरत हैं। घटना स्थल एक टर्निंग पॉइंट है, जहां तेज रफ्तार भारी वाहनों की आवाजाही पहले से ही दुर्घटनाओं की वजह बनती रही है।

आधे घंटे तक नहीं पहुंची कंपनी की रेस्क्यू टीम मानवता शर्मसार

घटना स्थल से कंपनी सिर्फ 100 कदम की दूरी पर थी, लेकिन अमलगम स्टील प्रबंधन द्वारा हाइड्रा या रेस्क्यू टीम भेजने में 30 मिनट से भी ज्यादा समय लग गया। इस देरी ने ग्रामीणों के बीच आक्रोश को और भड़का दिया। सवाल उठ रहा है कि क्या किसी प्रबंधन की संवेदना इतनी सुन्न हो सकती है कि अपने ही कर्मचारी को बचाने के लिए आधे घंटे तक इंतजार कराया जाए?

सीएसआर के नाम पर लाखों खर्च करने वाले प्रबंधन की यह निष्ठुरता ग्रामीणों के बीच तीखी नाराजगी का कारण बनी हुई है।

अंततः ग्रामीणों के दबाव के बाद कंपनी ने एक लोडर भेजा, जिसकी मदद से घायल कर्मचारी को बाहर निकाला गया और तुरंत जमशेदपुर अस्पताल भेजा गया।

खस्ताहाल सड़क और धूल का अंबार, दुर्घटनाओं को दावत

स्थानीय लोगों के अनुसार अमलगम रोड की हालत किसी मौत के कुएँ से कम नहीं है। गड्ढों से भरी कच्ची सड़क, उड़ते धूल के बादल और उस पर दौड़ती भारी गाड़ियां और दोपहिया वाहन। इन स्थितियों में ऐसे हादसे होना कोई आश्चर्य की बात नहीं, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि दुर्घटनाओं को रोकने की जिम्मेदारी कंपनी और प्रशासन दोनों की है, जो लगातार विफल साबित हो रहे हैं।

ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, सड़क चौड़ीकरण और ट्रैफिक सिस्टम की मांग

हादसे के बाद ग्रामीण भारी संख्या में सड़क पर उतरे और कंपनी प्रबंधन के खिलाफ कड़ा विरोध किया। उनका कहना है कि सड़क चौड़ी की जाए
मेन रोड से कंपनी गेट तक ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त हो भारी वाहनों की रफ्तार पर नियंत्रण लगाया जाए और प्रतिदिन पानी का छिड़काव किया जाय

ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि अब सब्र का बांध टूट रहा है। यदि ग्रामीण जाग गए, तो प्रबंधन उन्हें रोक नहीं पाएगा। आम आदमी की जान दो टके की नहीं है।

इस दिल दहला देने वाली घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक लापरवाही, खराब सड़कें और संवेदनहीन सिस्टम लोगों की जान लेते रहेंगे?

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