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नशीले पदार्थ का सेवन से बढ़ाता है तमोगुण

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शराब एवं शराब के जैसा अन्य नशीले पदार्थ पीने से मन एवं शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है
जमशेदपुर:
आनंद मार्ग यूनिवर्सल रिलीफ टीम ग्लोबल की ओर से सोनारी , कदमा एवं गदरा क्षेत्र में “शराब एवं शराब के जैसे अन्य नशीले पदार्थ मानव समाज के लिए हानिकारक ” विषय को लेकर लोगों को समझाया जा रहा । सुनील आनंद ने कहा कि लोगों में शराब पीने से सृष्टि पर तमोगुण का प्रभाव बढ़ जाता है एवं शरीर एवं मन की प्रतिरोधक क्षमता भी कम होती है एवं उन सब नकारात्मक कार्य को मनुष्य करने के लिए विवश हो जाता है जो कार्य चेतन अवस्था में करना नहीं चाहता ,अचेतन अवस्था में मनुष्य कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाता है कारण मन ही पांचो कर्मद्रीय एवं पांचों ज्ञानेंद्रिय का संचालन करती है ।नशा करने से मन नशीला हो जाता है मतवाला हो जाता है इसलिए उसे यह नहीं पता कि वह क्या गलत एवं सही कर रहा है इसलिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को इन सब नशीले पदार्थों से दूर रहने की जरूरत है।
चेतना और जागरूकता में बाधा: आध्यात्मिकता का मूल तत्व आत्म-जागरूकता और उच्च चेतना की स्थिति प्राप्त करना है। शराब मन की सोचने-समझने की क्षमता को कम कर देती है, जिससे व्यक्ति सही और गलत के बीच अंतर नहीं कर पाता है। यह जागरूकता के मार्ग में एक बड़ी बाधा है।
ऊर्जा और आभा को प्रभावित करना: आध्यात्मिक मान्यताएं मानती हैं कि शराब व्यक्ति की ऊर्जा को बाधित करती है और उसकी आभा (ऑरा) को कमजोर करती है।
तामसिक गुणों में वृद्धि: विशेषकर भगवद् गीता में, शराब को “तमोगुण” (अज्ञानता, जड़ता और निराशा की स्थिति) के अंतर्गत आने वाला पदार्थ माना गया है। तामसिक खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों का सेवन व्यक्ति को आध्यात्मिक प्रगति से दूर ले जाता है।
तर्कसंगतता और निर्णय लेने की क्षमता का ह्रास: शराब व्यक्ति की तार्किक क्षमता को कमजोर करती है और उसे नशे की स्थिति में ले जाती है। इस स्थिति में व्यक्ति अक्सर ऐसे कार्य कर बैठता है जो अनैतिक या पापपूर्ण माने जाते हैं, जैसे झगड़े, गाली-गलौज या अपराध।
परमात्मा से संबंध में रुकावट: कई आध्यात्मिक परंपराएं मानती हैं कि शराब गहन जागरूकता और परमात्मा या स्रोत से व्यक्ति के जुड़ाव में रुकावट पैदा करती है। यह व्यक्ति को बाहरी दुनिया के बजाय एक भ्रामक, शराब-प्रेरित वास्तविकता में रहने पर मजबूर करती है।
आसक्ति और गुलामी: शराब की लत व्यक्ति को उस पदार्थ का गुलाम बना देती है, जिससे काम, परिवार और दोस्तों के प्रति उसकी प्रतिबद्धताएं प्रभावित होती हैं। आध्यात्मिकता मुक्ति और आसक्ति से ऊपर उठने की शिक्षा देती है, जो शराब की लत के बिल्कुल विपरीत है।

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